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कहते हैं कि शिशॠके लिठमां का दूध अमृत के समान होता है, लेकिन अगर अधिक उमà¥à¤° तक बचà¥â€à¤šà¥‡ को सà¥â€à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ करवाया जाठतो कà¥â€à¤¯à¤¾ तब à¤à¥€ शिशॠको इसके फायदे मिलते हैं?
शिशॠके लिठ6 महीने की उमà¥à¤° तक मां का दूध सबसे जà¥â€à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ जरूरी होता है। 6 माह तक शिशॠके पोषण का à¤à¤•मातà¥à¤° जरिया सिरà¥à¤« मां का दूध ही होता है। इसके बाद शिशॠको ठोस आहार देना शà¥à¤°à¥‚ किया जाता है और मां के दूध पर उसकी निरà¥à¤à¤°à¤¤à¤¾ कम होती चली जाती है। कहते हैं कि à¤à¤• साल की उमà¥à¤° तक बचà¥â€à¤šà¥‡ को मां का दूध पिलाना चाहिà¤, लेकिन कà¥à¤› मांà¤à¤‚ इसके बाद à¤à¥€ बचà¥â€à¤šà¥‡ को दूध पिलाना जारी रखती हैं।
कà¥à¤› मांà¤à¤‚ बचà¥â€à¤šà¥‹à¤‚ को 6 महीने या à¤à¤• साल के बाद ही दूध पिलाना बंद कर देती हैं जबकि कà¥à¤› 3, 4 या यहां तक कि पांच साल की उमà¥à¤° तक दूध पिलाती हैं। लगà¤à¤— 25 फीसदी महिलाà¤à¤‚ अपने बचà¥â€à¤šà¥‹à¤‚ को 24 महीने या इससे जà¥â€à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ समय तक अपना दूध पिलाती हैं। विशà¥â€à¤µ सà¥â€à¤µà¤¾à¤¸à¥â€à¤¥à¥â€à¤¯ संगठन के अनà¥à¤¸à¤¾à¤°, 6 महीने तक ही शिशॠको मां का दूध पिलाना चाहिठऔर इसके बाद दो साल की उमà¥à¤° तक उसे धीरे-धीरे ठोस आहार देना शà¥à¤°à¥‚ करना चाहिà¤à¥¤
सà¥â€à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ करवाने वाली महिलाà¤à¤‚ कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚ लगाती हैं अपनी बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥â€à¤Ÿ पर पतà¥à¤¤à¤¾ गोà¤à¥€
- निपà¥â€à¤ªà¤² में आई दरार से बैकà¥â€à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ के सà¥â€à¤¤à¤¨à¥‹à¤‚ के अंदर जाने पर सूजन और बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥â€à¤Ÿ टिशà¥â€à¤¯à¥‚ में संकà¥à¤°à¤®à¤£ होने को मैसà¥à¤Ÿà¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸ कहते हैं। बचà¥â€à¤šà¥‡ को लंबे समय तक दूध पिलाने और दूध पिलाने के बीच में बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥â€à¤Ÿ को आराम न देने की वजह से à¤à¥€ à¤à¤¸à¤¾ हो सकता है।
मैसà¥à¤Ÿà¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸ à¤à¤• बैकà¥â€à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤² इंफेकà¥â€à¤¶à¤¨ है जिसे आमतौर पर à¤à¤‚टीबायोटिक टà¥à¤°à¥€à¤Ÿà¤®à¥‡à¤‚ट से ठीक किया जाता है, लेकिन दरà¥à¤¦ और सूजन को कम करने के लिठआप पतà¥à¤¤à¤¾à¤—ोà¤à¥€ à¤à¥€ इसà¥â€à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² कर सकती हैं।
साफ, सूखी और ठंडी बंदगोà¤à¥€ की कà¥à¤› पतà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ लें और उनà¥â€à¤¹à¥‡à¤‚ अपनी बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥â€à¤Ÿ पर लगाà¤à¤‚। इन पतà¥â€à¤¤à¥‹à¤‚ से आपको अपनी पूरी बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥â€à¤Ÿ को कवर करना है। अगर निपà¥à¤ªà¤² पर दरà¥à¤¦, दरार या बà¥â€à¤²à¥€à¤¡à¤¿à¤‚ग है तो इसे न ढकें।
जब पतà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ गरà¥à¤® हो जाà¤à¤‚ या 20 मिनट के बाद इनà¥â€à¤¹à¥‡à¤‚ हटा दें। आप चाहें तो हलà¥â€à¤•े हाथों से बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥â€à¤Ÿ को धो सकती हैं। दोबारा इस नà¥à¤¸à¥â€à¤–े को करने पर इसà¥â€à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² की गई पतà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ का ही पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— न करें।
अगर आपने दूध पिलाना बंद कर दिया है तो दिन में तीन बार 20-20 मिनट के लिठआप इस उपाय को कर सकती हैं। इस बात का धà¥â€à¤¯à¤¾à¤¨ रखें कि इसके अधिक इसà¥â€à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² के कारण सà¥â€à¤¤à¤¨à¥‹à¤‚ में दूध की आपूरà¥à¤¤à¤¿ कम हो सकती है।
कई बार बचà¥â€à¤šà¥‡ को सà¥â€à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ बंद करवाने के बाद à¤à¥€ बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥â€à¤Ÿ में दूध आता रहता है और महिलाà¤à¤‚ सà¥â€à¤¤à¤¨à¥‹à¤‚ में दूध सà¥à¤–ाने के उपाय ढूंढने लगती हैं। आपको बता दें कि पतà¥à¤¤à¤¾ गोà¤à¥€ à¤à¥€ बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥â€à¤Ÿ के दूध को सà¥à¤–ाने का कारगर उपाय है। सà¥â€à¤¤à¤¨à¥‹à¤‚ में दूध कम करने की पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ को तेज करने के लिठआप पतà¥à¤¤à¤¾ गोà¤à¥€ का इसà¥â€à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² à¤à¥€ कर सकते हैं।
मैसà¥â€à¤Ÿà¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸ की तरह ही दूध सà¥à¤–ाने के लिठआपको पतà¥à¤¤à¤¾ गोà¤à¥€ का इसà¥â€à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² करना है। पतà¥à¤¤à¤¾ गोà¤à¥€ को गरà¥à¤® होने तक बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥â€à¤Ÿ पर लगाठरखें। आप अपनी मरà¥à¤œà¥€ से दिन में कई बार इस पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ को दोहरा सकती हैं।
इस नà¥à¤¸à¥â€à¤–े से दूध को सà¥à¤–ाने में कà¥à¤› दिनों का समय लग सकता है। इसके साथ आप बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥â€à¤Ÿ का दूध सà¥à¤–ाने के लिठऔर à¤à¥€ कई तरह के घरेलू नà¥à¤¸à¥â€à¤–े आजमा सकती हैं।
लंबे समय तक सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ करवाने के फायदे
यदि आप दो साल की उमà¥à¤° के बाद à¤à¥€ अपने बचà¥â€à¤šà¥‡ को दूध पिलाती हैं तो इससे मां और बचà¥â€à¤šà¥‡ को कई फायदे मिलते हैं।
पोषण मिलता है : कई लोगों को मानना है कि लंबे समय तक शिशॠकाे दूध पिलाने से कोई जरूरी पोषण नहीं मिलता है जबकि ये पूरा सच नहीं है। मां के दूध में मौजूद कैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤®, फैट, पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨, विटामिन ठऔर अनà¥â€à¤¯ पोषण ततà¥â€à¤µ होते हैं जो बचà¥â€à¤šà¥‡ के विकास में मदद करते हैं और वो जो à¤à¥€ खाते हैं, उसके लाठको दोगà¥à¤¨à¤¾ करने में à¤à¥€ मदद करते हैं।
शिशॠसà¥â€à¤µà¤¸à¥â€à¤¥ रहता है : माना जाता है कि बचà¥â€à¤šà¤¾ जितने लंबे समय तक मां का दूध पीता है, वो बीमारियों से उतने ही अधिक समय तक बचा रहता है। इन बचà¥â€à¤šà¥‹à¤‚ में कान का संकà¥à¤°à¤®à¤£ और शà¥â€à¤µà¤¸à¤¨ मारà¥à¤— के ऊपरी हिसà¥â€à¤¸à¥‡ में संकà¥à¤°à¤®à¤£ का खतरा कम पाया जाता है। मां का दूध बीमारियों के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ बचà¥â€à¤šà¥‡ की इमà¥â€à¤¯à¥‚निटी को बढ़ाता है।
मसà¥à¤¤à¤¿à¤·à¥â€à¤• का विकास : शिशॠके मसà¥à¤¤à¤¿à¤·à¥â€à¤• का विकास लगà¤à¤— 3 साल की उमà¥à¤° तक हो जाता है और बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥â€à¤Ÿ मिलà¥â€à¤• इस विकास को बढ़ावा देता है। 2011 में हà¥à¤ˆ à¤à¤• सà¥â€à¤Ÿà¤¡à¥€ वेसà¥â€à¤Ÿà¤°à¥à¤¨ ऑसà¥â€à¤Ÿà¥à¤°à¥‡à¤²à¤¿à¤¯à¤¨ पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी कोहोरà¥à¤Ÿ के अनà¥à¤¸à¤¾à¤°, अधिक समय तक मां का दूध पीने वाले बचà¥â€à¤šà¥‡ पढ़ाई में तेज थे। इस सà¥â€à¤Ÿà¤¡à¥€ में सà¥â€à¤•ूल जाने वाले 10 साल की उमà¥à¤° के बचà¥â€à¤šà¥‹à¤‚ को शामिल किया गया था।
बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥â€à¤Ÿ कैंसर का खतरा : कई रिसरà¥à¤šà¥‹à¤‚ और अधà¥â€à¤¯à¤¯à¤¨à¥‹à¤‚ में सामने आया है कि सà¥â€à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ से बचà¥â€à¤šà¥‡ ही नहीं बलà¥à¤•ि मां को à¤à¥€ कई लाठमिलते हैं। सà¥â€à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ करवाने से महिलाओं में बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥â€à¤Ÿ कैंसर, ओवरी कैंसर और à¤à¤‚डोमेटà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤² कैंसर का खतरा कम हो जाता है।
वेट कंटà¥à¤°à¥‹à¤² : पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी के बाद महिलाओं का वजन काफी बढ़ जाता है और शिशॠकी परवरिश में उनà¥â€à¤¹à¥‡à¤‚ à¤à¤•à¥â€à¤¸à¤°à¤¸à¤¾à¤‡à¤œ करने का समय ही नहीं मिल पाता है। सà¥â€à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ करवाने में कैलोरी लगती है जो कि पà¥à¤°à¤¾à¤•ृतिक रूप से वजन घटाने में मददगार है।
सà¥â€à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ करवाने वाली महिलाà¤à¤‚ कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚ लगाती हैं अपनी बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥â€à¤Ÿ पर पतà¥à¤¤à¤¾ गोà¤à¥€
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निपà¥â€à¤ªà¤² में आई दरार से बैकà¥â€à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ के सà¥â€à¤¤à¤¨à¥‹à¤‚ के अंदर जाने पर सूजन और बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥â€à¤Ÿ टिशà¥â€à¤¯à¥‚ में संकà¥à¤°à¤®à¤£ होने को मैसà¥à¤Ÿà¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸ कहते हैं। बचà¥â€à¤šà¥‡ को लंबे समय तक दूध पिलाने और दूध पिलाने के बीच में बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥â€à¤Ÿ को आराम न देने की वजह से à¤à¥€ à¤à¤¸à¤¾ हो सकता है।
मैसà¥à¤Ÿà¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸ à¤à¤• बैकà¥â€à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤² इंफेकà¥â€à¤¶à¤¨ है जिसे आमतौर पर à¤à¤‚टीबायोटिक टà¥à¤°à¥€à¤Ÿà¤®à¥‡à¤‚ट से ठीक किया जाता है, लेकिन दरà¥à¤¦ और सूजन को कम करने के लिठआप पतà¥à¤¤à¤¾à¤—ोà¤à¥€ à¤à¥€ इसà¥â€à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² कर सकती हैं।
साफ, सूखी और ठंडी बंदगोà¤à¥€ की कà¥à¤› पतà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ लें और उनà¥â€à¤¹à¥‡à¤‚ अपनी बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥â€à¤Ÿ पर लगाà¤à¤‚। इन पतà¥â€à¤¤à¥‹à¤‚ से आपको अपनी पूरी बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥â€à¤Ÿ को कवर करना है। अगर निपà¥à¤ªà¤² पर दरà¥à¤¦, दरार या बà¥â€à¤²à¥€à¤¡à¤¿à¤‚ग है तो इसे न ढकें।
जब पतà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ गरà¥à¤® हो जाà¤à¤‚ या 20 मिनट के बाद इनà¥â€à¤¹à¥‡à¤‚ हटा दें। आप चाहें तो हलà¥â€à¤•े हाथों से बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥â€à¤Ÿ को धो सकती हैं। दोबारा इस नà¥à¤¸à¥â€à¤–े को करने पर इसà¥â€à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² की गई पतà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ का ही पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— न करें।
अगर आपने दूध पिलाना बंद कर दिया है तो दिन में तीन बार 20-20 मिनट के लिठआप इस उपाय को कर सकती हैं। इस बात का धà¥â€à¤¯à¤¾à¤¨ रखें कि इसके अधिक इसà¥â€à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² के कारण सà¥â€à¤¤à¤¨à¥‹à¤‚ में दूध की आपूरà¥à¤¤à¤¿ कम हो सकती है।
कई बार बचà¥â€à¤šà¥‡ को सà¥â€à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ बंद करवाने के बाद à¤à¥€ बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥â€à¤Ÿ में दूध आता रहता है और महिलाà¤à¤‚ सà¥â€à¤¤à¤¨à¥‹à¤‚ में दूध सà¥à¤–ाने के उपाय ढूंढने लगती हैं। आपको बता दें कि पतà¥à¤¤à¤¾ गोà¤à¥€ à¤à¥€ बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥â€à¤Ÿ के दूध को सà¥à¤–ाने का कारगर उपाय है। सà¥â€à¤¤à¤¨à¥‹à¤‚ में दूध कम करने की पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ को तेज करने के लिठआप पतà¥à¤¤à¤¾ गोà¤à¥€ का इसà¥â€à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² à¤à¥€ कर सकते हैं।
मैसà¥â€à¤Ÿà¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸ की तरह ही दूध सà¥à¤–ाने के लिठआपको पतà¥à¤¤à¤¾ गोà¤à¥€ का इसà¥â€à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² करना है। पतà¥à¤¤à¤¾ गोà¤à¥€ को गरà¥à¤® होने तक बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥â€à¤Ÿ पर लगाठरखें। आप अपनी मरà¥à¤œà¥€ से दिन में कई बार इस पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ को दोहरा सकती हैं।
इस नà¥à¤¸à¥â€à¤–े से दूध को सà¥à¤–ाने में कà¥à¤› दिनों का समय लग सकता है। इसके साथ आप बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥â€à¤Ÿ का दूध सà¥à¤–ाने के लिठऔर à¤à¥€ कई तरह के घरेलू नà¥à¤¸à¥â€à¤–े आजमा सकती हैं।
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